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अमौली विकास खंड की ग्राम पंचायत चांदपुर सो सबसे बड़ी ग्राम पंचायत का दर्जा मिला है | आठ मजरों में बंटी इस ग्राम पंचायत के विकास के लिए मनरेग और ग्राम निधि की थैली खोलकर कम कराया जा रहा ही|

राष्‍ट्रीय समाचार

ई-मेल आइडी न होने पर फिसड्डी माने जाएंगे झारखंड के अफसर
ठ्ठ प्रदीप सिंह, रांची व्यक्तिगत ई-मेल आइडी देने का झारखंड सरकार का नया फरमान अब सरकारी बाबुओं की गले की हड्डी बनने वाला है। अब वे यह भी बहाना नहीं बना सकते कि फलां सरकारी आदेश की प्रति उन्हें नहीं मिली। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग के नए आदेश के तहत राज्य सरकार में कार्यरत झारखंड प्रशासनिक सेवा के तमाम अधिकारियों को अपनी व्यक्तिगत ई-मेल आइडी देना अनिवार्य होगा। अगर वे 15 दिनों के भीतर अपनी ई-मेल आइडी नहीं सौंपते हैं तो उनके खिलाफ सेवा पुस्तिका में प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज की जाएगी। यही नहीं, विभाग स्वत: उनके वार्षिक गोपनीय अभियुक्ति में यह दर्ज करेगा कि वे सूचना प्रौद्योगिकी के ज्ञान में फिसड्डी हैं। कार्मिक विभाग की यह कवायद राज्य सरकार की उस कोशिश का हिस्सा है जिसमें अक्सर हिदायत दी जाती है कि अद्यतन सूचना तकनीक को अपनाकर सारे विभाग अपने दैनिक कामकाज को ज्यादा से ज्यादा पारदर्शी बनाएं। अफसरों की ई-मेल आइडी होने से पलक झपकते ही राज्य सचिवालय से दूरदराज के हिस्सों तक सहज ही संदेश पहुंच जाएगा। इस कवायद में सबसे बड़ी मुश्किल कनेक्टिविटी की है। दूरदराज के इलाकों में आज भी ब्रांडबैंड समेत अन्य नेट सुविधा प्रदाता कंपनियों की सेवा उपलब्ध नहीं है। हालांकि मुंडा ने हाल ही में बीएसएनएल अधिकारियों के साथ बैठक में निर्देश दिया था कि तमाम क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जाए। अगर इस दिशा में सफलता मिली तो राज्य सरकार की कवायद का असर दिखेगा। अर्जुन मुंडा हैं टेक्नो फ्रेंडली मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा खुद अद्यतन सूचना तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। इलेक्ट्रानिक गजट के शौकीन मुंडा ने अपने पूर्व के कार्यकाल में तमाम जिलों को राज्य मुख्यालय से जोड़ने की पहल करते हुए झारनेट का गठन किया था। वह अक्सर जिला मुख्यालयों में मौजूद अफसरों से वीडियो कांफ्रेंसिंग से विकास योजनाओं की प्रगति का जायजा लेते हैं। मुंडा ने अधिकारियों को निर्देश दे रखा है कि सूचना प्रौद्योगिकी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल कर रोजमर्रा के कामकाज को सुगम और पारदर्शी बनाएं। इसके अलावा हर विभाग अपना डाटा बैंक बनाए ताकि योजनाओं की मॉनीटरिंग के साथ-साथ अफसरों के कामकाज की भी समीक्षा की जा सके।…………………..click here